इंडो आर्य और मूल भारतीय आर्य विश्लेषण
*इंडो आर्य और भारतीय मूल आर्य* ***************************** जैन दर्शन में वर्णित 'आर्य और म्लेच्छ' की अवधारणा और आधुनिक इतिहास विज्ञान द्वारा स्थापित 'मध्य एशियाई आर्य' की अवधारणा के बीच एक बहुत बड़ा वैचारिक और मौलिक अंतर है। जहाँ जैन धर्म इसे *आध्यात्मिक, नैतिक और भौगोलिक* दृष्टि से देखता है, वहीं आधुनिक इतिहास और आनुवंशिक (Genetic) विज्ञान इसे *भाषाई और जैविक (Steppe DNA)* दृष्टि से परिभाषित करता है। इन दोनों अवधारणाओं का तुलनात्मक विश्लेषण इस प्रकार है- 1. जैन दर्शन में आर्य और म्लेच्छ जैन ग्रंथों (जैसे तत्त्वार्थसूत्र, जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति और आदिपुराण) में आर्य और म्लेच्छ का विभाजन किसी नस्ल (Race) या भाषा पर आधारित नहीं है, बल्कि यह *कर्म (आचरण)* और *भौगोलिक स्थिति* पर आधारित है। *आर्य-* जैन धर्म में 'आर्य' उसे कहा गया है जो नैतिक रूप से श्रेष्ठ हो, जो अहिंसा, सत्य और संयम का पालन करता हो। भौगोलिक रूप से, जो लोग 'कर्मभूमि' (जहाँ तीर्थंकरों का जन्म होता है और जहाँ धर्म का उपदेश दिया जाता है) में जन्म लेते हैं और धर्म का पालन करते हैं, वे आर्य ...