26. सम्मेदशिखरजी संरक्षण एवं सम्बर्धन: संयुक्त सर्वेक्षण की आवश्यकता

 मुकुट सप्तमी-             

*सम्मेद शिखरजी संरक्षण एवं संवर्धन: संयुक्त सर्वेक्षण की आवश्यकता*

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         श्री सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ पर्वत) जैन धर्म की आस्था का सर्वोच्च केंद्र और 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि है। वर्तमान समय में तीर्थ की पवित्रता, भौगोलिक सीमाओं, ऐतिहासिक अभिलेखों और टोंकों के मूल वीतरागी स्वरूप के समक्ष विविध चुनौतियाँ (जैसे अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण, सामाजिक/धार्मिक विवाद एवं अनियंत्रित पर्यटन) उत्पन्न हो रही हैं।

       इन चुनौतियों के स्थायी और प्रामाणिक समाधान के लिए दिगम्बर एवं श्वेताम्बर समाज के साझा मंच द्वारा एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ सर्वेक्षण दल गठित किया जाना समय की मांग है।


*प्रस्तावित सर्वेक्षण दल की संरचना*-

      सर्वेक्षण दल को बहुआयामी दृष्टिकोण देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के शीर्ष विशेषज्ञों को सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित है-


*कार्यक्षेत्र-प्रस्तावित प्रतिनिधि-विशेषज्ञ-*

* न्यायिक एवं विधिक-  जैन समाज के सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट / हाई कोर्ट के न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता

* प्रशासनिक एवं सुरक्षा-  सेवानिवृत्त IAS / IPS / IFS (वन सेवा) अधिकारी ।

* पुरातत्व एवं इतिहास- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व विशेषज्ञ एवं जैन पांडुलिपि/अभिलेख विज्ञानी 

* संस्थागत प्रतिनिधित्व- श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी एवं सेठ आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी के अधिकृत प्रतिनिधि 

* आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग- जैन समाज के प्रतिष्ठित उद्योगपति (भामाशाह), GIS मैपिंग व ड्रोन विशेषज्ञ 

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 *सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली*- 

 * उच्च-स्तरीय डिजिटल प्रलेखन-

 * 31 टोंकों, प्राचीन चरण पादुकाओं, छतरियों और मंदिरों की 3D लेजर स्कैनिंग, हाई-डेफिनिशन वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी।

 * पर्वत के 27 किलोमीटर वंदना मार्ग और तलहटी (मधुबन) का ड्रोन मैपिंग व GIS जियो-टैगिंग।

 * पुरातत्व व ऐतिहासिक साक्ष्य संकलन:

 * मुगलकालीन फरमानों, ब्रिटिश गजेटियर्स, 1933 के प्रिवी काउंसिल रिकॉर्ड्स, और टोंकों पर अंकित प्राचीन शिलालेखों का प्रामाणिक प्रमाणीकरण।


 * श्वेत-पत्र व डिजिटल आर्काइव-

 * 'सम्मेद शिखरजी- स्टेटस एंड विज़न डॉक्यूमेंट' तैयार करना, जिसे केंद्र सरकार, राज्य सरकार और न्यायालयों में अधिकृत साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।


*इस संयुक्त सर्वेक्षण के प्रमुख लाभ-*

 * मूल स्वरूप की सुरक्षा: भविष्य में किसी भी पक्ष या असामाजिक तत्व द्वारा टोंकों, चरणों या मार्ग में किए जाने वाले किसी भी अनधिकृत बदलाव या अतिक्रमण को न्यायालय में तत्काल चुनौती दी जा सकेगी।

 * साझा कानूनी शक्ति: दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों पक्षों द्वारा सर्वसम्मति से तैयार किया गया दस्तावेज अदालतों और प्रशासन के समक्ष अकाट्य साक्ष्य बनेगा।

 * पर्यटन व असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश: पर्वत की वन भूमि और पवित्र क्षेत्र की स्पष्ट सीमाएं तय होने से 'इको-टूरिज्म' और असामाजिक तत्वों द्वारा जमीन पर कब्जे के दावों को कानूनी रूप से निष्प्रभावी किया जा सकेगा।

 * प्रामाणिक प्रचार-प्रसार: जैन समाज और जनसामान्य के बीच पर्वत के सही इतिहास, धार्मिक मर्यादा और पुरातात्विक साक्ष्यों का सटीक विवरण प्रस्तुत होगा।


*आवश्यक सावधानियां-*

 * आंतरिक विवादों से पूर्ण अलगाव: सर्वेक्षण का उद्देश्य पर्वत के ऐतिहासिक और भौतिक स्वरूप का दस्तावेजीकरण करना है, न कि दोनों संप्रदायों के आंतरिक पूजा-पद्धति संबंधी विवादों को कुरेदना।

 * स्थानीय संवेदनशीलता का ध्यान: सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय आदिवासी समाज (संथाल समुदाय) और स्थानीय निवासियों के साथ कोई टकराव की स्थिति न बने।

 * पारदर्शिता और सहमति: सर्वेक्षण के प्रत्येक चरण में दोनों संप्रदायों के प्रतिनिधियों के संयुक्त हस्ताक्षर और सहमति अनिवार्य हो, ताकि भविष्य में कोई पक्ष रिपोर्ट की निष्पक्षता पर प्रश्न न उठा सके।

 * सुरक्षा व गोपनीयता: तैयार किए गए डिजिटल डेटा, नक्शों और वीडियो फुटेज को सुरक्षित डिजिटल लॉकर में रखा जाए, ताकि संवेदनशील जानकारी का कोई दुरुपयोग न हो।


*व्यावहारिक क्रियान्वयन का मार्ग-*

 * प्रथम चरण: दोनों संप्रदायों के शीर्ष संतों के आशीर्वाद से एक संयुक्त कोर कमेटी बने, जो सर्वेक्षण दल के सदस्यों के नाम तय करे।

 * द्वितीय चरण: झारखंड सरकार (जिला प्रशासन, गिरिडीह एवं वन विभाग) को औपचारिक सूचना देकर प्रशासनिक और सुरक्षा सहयोग प्राप्त किया जाए।

 * तृतीय चरण: निर्धारित समय-सीमा (जैसे 30-45 दिन) में मैदानी कार्य पूरा कर औपचारिक 'सम्मेद शिखर हेरिटेज एवं प्रोटेक्शन मास्टर प्लान' प्रकाशित किया जाए।

नोट- अगर श्वेताम्बर संघ इसके लिए तैयार नहीं हैं त दिगम्बर तीर्थक्षेत्र कमेटी को अपने स्तर पर सर्वेक्षण करवाना चाहिए। कमोवेश सभी क्षेत्रों के लिए फार्मूला हो सकता है।


निवेदक-

अरविन्द कुमार जैन

जयपुर -9529530051

दि. -19/08/2026

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